आनेवाला रुक न पायेगा, रुकता जायेगा हर कदम वो कराम्गाह है जो मेरी
तेरे इज्म में है जुनून तो फिर गुज़र जायेगा काफिला इस इश्क का|
सुनता गया में मद में चूर उसके ख्याल की ग़ज़ल को
लफ्ज़ से गिरते गए मोती और हमारे दिल में हज़ार जवाहरात बन गए |
जो दूर से दिखा था, खो गया वोह रास्ता वोह गली वो मोहल्ला वो घराना
घूमता हूँ अब दरबदर बस उसका दर ही है मेरा ठिकाना |
तेरी नज़र ने दी पनाह तो में ख़ाक से फूल बन सका
जो न होता तेरा करम दर दर की धूल भी न होता |
आज न कहना भूल गया मैं तुझे , तुझे याद करने में ताउम्र भटकता रहा
तेरी याद है तो सुकून है इस दिल को , अब भूला तो जीना क्या मरना बमुश्किल होगा |
जो तेरी याद का दर्द है इस सीने में, हर आह तेरे दीदार का एक ख्वाब है
मेरे अश्कों की गर्माइश इस दिल में जलते जलजले का सुबूत है |
Rumi and Hubba Khatoon were both mystical poets, who sang songs of love and longing for their beloved.Both had lost someone they loved and cherished dearly, in Rumi's case it was his friend and mystical teacher Shams and Hubba lost her love Yusuf Shah who was imprisoned by Akbar, he died in captivity.
Sometimes separation from a beloved becomes a reason and the force to find the divine.
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